दिनांक 10 जनवरी, 2026 और 22 जनवरी,2026को हिंदी विभाग द्वारा प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए नैतिक मूल्य शिक्षण कक्षा आयोजित की गई जिसका विषय था प्लास्टिक से दूरी, पर्यावरण के लिए है ज़रूरी। वीडियो के माध्यम से छात्राओं ने भारत में जल प्रदूषण की गंभीर समस्या को समझा तथा नदियों और समुद्र को प्रदूषण मुक्त करने के उपाय पर विचार किया। विश्व भर की 1000 सबसे प्रदूषित नदियों में से 144 भारत में हैं जिसका सबसे मुख्य कारण है प्लास्टिक। वीडियो में विभिन्न देशों के उदाहरणों द्वारा इस समस्या का समाधान भी बताया गया है। थाईलैंड, मलेशिया, वियतनाम जैसे विकासशील देश नदियों और समुद्र को स्वच्छ करने के लिए तकनीक की सहायता ले रहे हैं। इंटरसेप्टर नामक ओशियन क्लीनअप मशीन का प्रयोग प्लास्टिक के कचरे को इकट्ठा करने के लिए किया जा रहा है। छात्राओं ने समझा कि इस देश का नागरिक होने के नाते हमारा यह कर्त्तव्य बनता है कि हम अपनी नदियों एवं अन्य जल स्त्रोतों की केवल पूजा न करें बल्कि उनका सम्मान भी करें और उसे स्वच्छ रखने में अपनी भूमिका निभाएं। प्रथम वर्ष की प्रशिक्षक डॉ मंजुला सुशीला, द्वितीय वर्ष की प्रशिक्षक डॉ दीपा श्रीवास्तव तथा तृतीय वर्ष की प्रशिक्षक डॉ सुषमा चौबे थीं।


